खुशबू है,
स्वाद है
कुछ चीज़ें, पैमाने से परे हैं ।
सोच है -
किसी ने नापा नहीं
तौला नहीं
मूल नहीं पर अस्तित्व है,
अगाध नहीं, असंख्य नहीं
बस पैमाने से परे हैं ।
Saturday, September 11, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
इतना आसान नहीं होता
इतना आसान नहीं होता हवाओं से हल्के मन को खुली फ़िज़ाओं में उड़ने देना! कई गिरह खोलने पड़ते हैं कई कड़ियाँ तोड़नी पड़ती हैं और देखिए विडम्बना...
-
दूर दूर तक खेत दिखते हैं, ज़्यादा फ़रक भी नहीं है, कम से कम खेतों में। कभी हल्के रंग दिखते हैं और कहीं गहरे धानी। फ़सल गेहूँ सी लगती है पर क...
-
“कुपुत्रो जायेत, क्वचिदपि कुमाता न भवति”, देवी दुर्गा क्षमायाचना स्तुति की ये पंक्तियाँ जैसे हमें भावार्थ सहित कंठस्थ है। और कैसे न हो जिस...
No comments:
Post a Comment