Saturday, November 25, 2017

गुलज़ार

फूलों के गुच्छे हैं लदे
जाने क्यों कॉंटों की चर्चा है
खुशियों को दरकिनार कर
जाने क्यों हर दिल ग़म से वाबस्ता है!

जो पग अंगारों पर चलते हैं
उनका कॉंटे से ही रिश्ता है
गुच्छे तो उनको बहलाते हैं
सुकून जिनके दिल में बसता है।

मुख़्तलिफ़ नज़रों से देखो तो
न फूल हैं, न कॉंटे वहॉं,
जिसपर जो जो गुज़री है
गुलज़ार में उसे वही दिखता है।

No comments:

Post a Comment

सब कुछ

हाड़ मांस का ये शरीर   प्राण जैसा कुछ तो है कहते हैं जिसको आत्मा  जान गए तो सब कुछ है। नासमझी की है रैली पुरज़ोर है आडम्बर, बह गए तो व्यर्थ ...