Thursday, November 07, 2019

महंगा सौदा

जीवन की सबसे बड़ी पूँजी 
हर सुबह 
किसी और के हाथ
छोड़ आता हूँ
जाने इस महंगे सौदे में 
कितना खोता हूँ
और क्या कमाता हूँ?

आज की फ़िक्र नहीं
कल की आस में
आसमान काटता हूँ;
जानता हूँ 
मृगतृष्णा है कल,
फिर भी खुद को बहलाता हूँ 
जाने इस महंगे सौदे में 
कितना खोता हूँ
और क्या कमाता हूँ?

लाज़मी है कि तुम मुझसे बिफरे रहो!

मैं ख़ुद ही नहीं वो जो मैं पहले था तो लाज़मी है कि तुम मुझसे बिफरे रहो! कभी था मस्त मौला न पीछे की सोच, न आगे का डर! थोड़ी अकड़, थोड़ा निष्फ...