Saturday, April 19, 2025
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सब कुछ
हाड़ मांस का ये शरीर प्राण जैसा कुछ तो है कहते हैं जिसको आत्मा जान गए तो सब कुछ है। नासमझी की है रैली पुरज़ोर है आडम्बर, बह गए तो व्यर्थ ...
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Sholay is not a movie, its a way of life...at least my life ;) Watching Sholay on the big screen (that too in 3D) was a complete e...
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कहीं छंदों का कहीं संगों का कहीं फूल बहार के खेलों का चट्टानों, झील समंदर का सुन्दर रंगीन उपवनों का ख़ुशबू बिखेरती सुगंध का, कभी रसीले पकवान...
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यूँ ही कब कहाँ ये जीत पाती हर मोड़ पर सकुचाती हर चोट पर मुरझाती एक नज़र पडे तो इतराती अनजान कभी इसे है भाता एक रंग ही कभी रम जाता कभी ...

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