Tuesday, January 01, 2013

तिरस्कार

इतिहास के पन्नो में है बदा,
रामायण-महाभारत भी करते इसका बखान
आर्यावर्त के शूरों ने कब किया है औरत का सम्मान .

वस्त्र हर कर मार ठहाके
लज्जा भी हुई घोर सभा में नीलाम
आर्यावर्त के शूरों ने कब किया है औरत का सम्मान .

जग पूजता उनको, पुरुषों में मर्यादा में उत्तम
जाने वो हुए कैसे महान
हो ना पाया जब उनसे अपनी ही भार्या का सम्मान

युग बदला, लोग बदले
हीन सोच पर लगा नहीं पुण्याविराम
पवित्र सति के नाम जाने कितनो के फूंके प्राण
देवदासी बना कुचले कितनो ने उनके अरमान
आर्यावर्त के शूरों ने कब किया है औरत का सम्मान .

1 comment:

अनुभव की गठरी

कैसे दूँ तुम्हें मैं अपने अनुभव की गठरी ? भरे हैं जिसमें मैंने- मेरा गुरूर, मेरी जीत मेरा गर्व, मेरी प्रेरणा  मेरी ईर्ष्या, मेरा भ्रम, मेरी ...