Saturday, June 20, 2020


फिर हाथ सलामी में उठे
फिर कई ऑंखें रोईं
फिर सीने ठोके गए
पुष्पांजलि की आड़ में कितने छुपे
हुआ खूब हल्ला
बहिष्कार, बहिष्कार!

चार दिन बाकियों ने मनाया शोक
फिर इतिहास ने चादर काढ़ी,
मौत आँकड़े बन गये
हादसा बन गई तारीख़।
भभकती कभी कभी ये चीत्कार 
पलटवार, पलटवार!

जिनसे उनकी दुनिया छिन गई
फेर कर देखो उनसे ज़िंदगी
दिलों के टीस में दबी 
दम तोड़ती ये चीत्कार 
क्यों व्यर्थ अब यलगार!

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