Thursday, September 03, 2026

सब कुछ

हाड़ मांस का ये शरीर 

प्राण जैसा कुछ तो है

कहते हैं जिसको आत्मा 

जान गए तो सब कुछ है।


नासमझी की है रैली

पुरज़ोर है आडम्बर,

बह गए तो व्यर्थ है

आत्मविश्वास की डोर पकड़ 

जो डटे रहे तो सब कुछ है।


माया का है जाल

कोशिश है बेकार

जो फँसा रहा

वही उलझा

जो न जुड़े तो सब कुछ है।

सब कुछ

हाड़ मांस का ये शरीर   प्राण जैसा कुछ तो है कहते हैं जिसको आत्मा  जान गए तो सब कुछ है। नासमझी की है रैली पुरज़ोर है आडम्बर, बह गए तो व्यर्थ ...